Thursday, February 14, 2013

जंगल कप


इन्द्रधनुष का गोल बना कर
बादल का मैदान जमाकर
सोमवार को हुआ था पोल
मिलकर खेलेंगे  फुटबॉल
हाथी, भालू, बंदर, तोता

मंगल को जंगल कप होता
छम से बिल्ली बुध को आई
जब चूहों की बारी आई
गुरु को हाथी दादा आये
सूंड मार कर बॉल उड़ाए

शुक्र को खूब झमा-झम झम
नाचे मोर छमा छम छम
शनि को आए भालू भाई
आधे मैदान दौड़ लगाई
दौड़ हांफते दिये दो गोल
जंगल मे खेली फुटबॉल

रविवार को बदली चाल
चींटी ने किया कमाल,
मिलकर जीता जंगल फुटबॉल

10 comments:

  1. aap ki kavita meri kavita jaisi h. ye h meri kavita.

    haathi k suund hoti hai
    battak k choch hoti hai
    chidiya k choch hoti hai
    kauve k choch hoti hai
    bakri k puunch hoti hai
    sher k mu hota hai
    har koi raat ko sota hai
    din m har koi jagta hai
    jo din ko jb sota hai
    wahi raat ko jagta hai
    kauve ka rang kaala hai
    mohan ka chota bhai lala hai
    mujhko kuch nai aata hai
    fir bhi geet ban jaata hai
    :P :P :P :P

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  2. बहुत बढ़िया प्रवीणा

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  3. हाथी दादा ओढ़ लबादा जा पहुंचे बाज़ार
    जूते की दूकान देख कर मांगे जूते चार
    भालू जूते वाला बोला दादा कर दो माफ़
    इतने बड़े ना जूते बनते बड़ा तुम्हारा नाप

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  4. प्यारी कविता ....
    किया कमाल ...खूब धमाल ..!!

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  5. बेहद उम्दा रचना और बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आपको बहुत बहुत बधाई...
    नयी पोस्ट@आप की जब थी जरुरत आपने धोखा दिया (नई ऑडियो रिकार्डिंग)

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  6. आप का ब्लॉग बहुत सुंदर है । क्या आप अपना ई मेल आई डी देंगी मेरा ई मेल आई डी है anitakumar3@gmail.com

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  7. सार्थक प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (11-01-2015) को "बहार की उम्मीद...." (चर्चा-1855) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  8. सुन्दर प्रस्तुति

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  9. बहुत ही सुन्दर...
    :-)

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